पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। गोसाईगंज थाना क्षेत्र के रसूलपुर टिकनियामऊ गांव में नाली विवाद को लेकर हुई मजदूर की हत्या के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानपति समेत सात नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं फरार अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। शुक्रवार रात नाली से पानी निकासी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि जमकर लाठी-डंडे चले। मारपीट में आजाद (38) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए गोसाईगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना में मृतक की पत्नी अंजू समेत पड़ोसी सूरज सहित अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में उपचार जारी है ,घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल पीएसी तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। साथ ही थाना पुलिस लगातार गांव में गश्त करती रही। स्थिति सामान्य होने के बाद शनिवार को पीएसी को वापस बुला लिया गया ,मृतक की पत्नी अंजू की तहरीर पर पुलिस ने 16 नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने प्रधानपति मोहम्मद हसीब, चंद्रिका, रामसूचित, अभिषेक, सुमित, अमित और राजकरण को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया। एसएसआई प्रभात कुमार शुक्ला ने बताया कि शेष फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण मृतक का अंतिम संस्कार समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सका था।
वहीं शनिवार को जब मृतक का शव पोस्टमार्टम होकर गांव पहुंचा तो परिजनों व अन्य लोगों ने शव रखकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। साथ ही कहा कि मृतक के आश्रितों को मुआवजा दिया जाए तथा सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए साथ ही आरोपियों कर घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई की जाये उसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रदर्शन की सूचना पाकर एसएसआई प्रभात कुमार शुक्ला पुलिस टीम के साथ गोसाईगंज पहुंचे और परिजनों को उनकी मांगे पूरी कराने का अस्वाशन दिया। तब जाकर शव का अंतिम संस्कार किया गया।
प्रधानी चुनाव से जोड़कर भी देखी जा रही घटना
गांव में चर्चा है कि नाली विवाद के पीछे स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी एक वजह हो सकती है। ग्रामीणों के अनुसार मृतक आजाद पूर्व प्रधान अब्दुल कवि के समर्थक माने जाते थे, जबकि दूसरा पक्ष वर्तमान प्रधान इरम के पति मोहम्मद हसीब के साथ जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल घटना को दर्ज मुकदमे और साक्ष्यों के आधार पर जांच का विषय बताया है और किसी भी राजनीतिक एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।










