पकड़ी गई लकड़ी का मूल्यांकन कर वन विभाग वसूलेगा जुर्माना

बिना रॉयल्टी सागौन की लकड़ी ले जा रहा था डीसीएम पकड़ा, डीएफओ ने कार्रवाई की कही बात
पायनियर संवाददाता। पीलीभीत
जिला पंचायत की कथित नीलामी से काटी गई सागौन की लकड़ी को बिना रॉयल्टी ले जाते पकड़े गए डीसीएम के मामले में वन विभाग अब लकड़ी का मूल्यांकन कराकर जुर्माना वसूलने की तैयारी में है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 25 सितंबर को डीएफओ के लौटने के बाद पकड़ी गई लकड़ी की मात्रा और कीमत का आकलन कराया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई तय होगी।
सामाजिक वानिकी विभाग की टीम ने डीएफओ भरत कुमार डीके के निर्देश पर लकड़ी से भरे डीसीएम को पकड़ा था। बताया गया कि वाहन में सागौन की लकड़ी लदी थी और उसे बिना रॉयल्टी के ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के बाद वाहन और लकड़ी को कब्जे में लेकर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले लकड़ी का विधिवत मूल्यांकन कराया जाएगा। इसमें लकड़ी की मात्रा, प्रजाति और बाजार मूल्य समेत अन्य बिंदुओं को देखा जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर नियमानुसार जुर्माना निर्धारित किया जाएगा।
जुर्माना और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वाहन अथवा लकड़ी को रिलीज करने पर निर्णय लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद जिला पंचायत की ओर से की गई सागौन के पेड़ों की कथित ऑफलाइन नीलामी भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि करीब 70 पेड़ों की नीलामी महज नौ लाख रुपये में की गई, जबकि इनकी कीमत इससे काफी अधिक होने की बात कही जा रही है। नीलामी प्रक्रिया में सार्वजनिक विज्ञापन और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब वन विभाग की जांच में पकड़ी गई लकड़ी की वास्तविक मात्रा और कीमत सामने आने का इंतजार है। मूल्यांकन के बाद तय होने वाला जुर्माना इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि लकड़ी को किस प्रक्रिया के तहत काटकर ले जाया जा रहा था और उसके लिए आवश्यक रॉयल्टी क्यों नहीं जमा की गई। डीएफओ भारत कुमार ने बताया कि पकड़ी गई लकड़ी का मूल्यांकन करने के बाद जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाएगी।



