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अब जमीन नापने के लिए फीता नहीं, सैटेलाइट बताएगा सही माप

अब जमीन नापने के लिए फीता नहीं, सैटेलाइट बताएगा सही माप

खतौली। पायनियर समाचार सेवा। जमीन की पैमाइश को लेकर होने वाले विवादों पर अब तकनीक भारी पड़ने वाली है। राजस्व विभाग की पारंपरिक फीता नाप से आगे बढ़ते हुए अब सैटेलाइट आधारित रोवर मशीन से जमीन की पैमाइश की जाएगी। इससे खेत, प्लॉट और जमीन की सीमाएं अधिक सटीक तरीके से तय करने में मदद मिलेगी। शासन की ओर से जिले की सभी तहसीलों को यह आधुनिक मशीन उपलब्ध कराई गई है।

शुक्रवार को खतौली तहसील परिसर में रोवर मशीन का डेमो किया गया। अधिकारियों और लेखपालों की मौजूदगी में मशीन से पैमाइश की प्रक्रिया समझी गई। डेमो के दौरान मशीन से मिले परिणाम सटीक पाए गए। अधिकारियों ने मशीन के संचालन और उससे मिलने वाले तकनीकी परिणामों की जानकारी भी ली। ट्रंबल कंपनी की रोवर मशीन अक्षांश और देशांतर के आधार पर जमीन की लोकेशन और सीमाओं की पहचान करने में मदद करती है। सैटेलाइट से प्राप्त लोकेशन डाटा के आधार पर पैमाइश की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके चलते मैन्युअल तरीके से होने वाली नापजोख पर निर्भरता कम होगी। अब जमीन से जुड़े विवाद में लेखपाल को मौके पर पहुंचकर पारंपरिक तरीके से फीता डालकर पैमाइश करने की जरूरत कम होगी। तकनीकी उपकरण के जरिए जमीन की सीमाओं का निर्धारण किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि खेतों और भूखंडों की सीमाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों के निस्तारण में सटीक पैमाइश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नई तकनीक से नापजोख की प्रक्रिया आसान होने के साथ विवादों के समाधान में भी मदद मिलने की उम्मीद है। डेमो के दौरान एसडीएम डॉ. ललित मिश्रा, तहसीलदार अरविंद कुमार, नायब तहसीलदार अमित रस्तोगी समेत तहसील के लेखपाल और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

लेखपाल पर लगने वाले आरोप भी होंगे खत्म

जमीन की पैमाइश को लेकर गांवों में अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। कई बार एक पक्ष पैमाइश करने वाले कर्मचारी पर दूसरे पक्ष के समर्थन में रिपोर्ट या नाप करने का आरोप लगाता है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से इस तरह के आरोपों में कमी आएगी। एसडीएम डॉ. ललित मिश्रा ने बताया कि रोवर मशीन का उद्देश्य जमीन की पैमाइश को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। मशीन के इस्तेमाल से मैन्युअल काम कम होगा और मानवीय हस्तक्षेप भी घटेगा। उन्होंने कहा कि जमीन की सीमा को लेकर विवाद होने पर तकनीकी आधार पर पैमाइश किए जाने से पक्षकारों के बीच स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। इससे राजस्व मामलों के निस्तारण में भी सुविधा मिलेगी।

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