आसमान से कहर: मिराज ने कारगिल में तोड़ी दुश्मन की कमर

  • कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर द्रास में पूर्व सैनिकों ने साझा कीं यादें
  • मिग-21, मिग-27 और मिराज-2000 ने घुसपैठियों को खदेड़ा

द्रास/नई दिल्ली। कारगिल की चोटियों पर वर्ष 1999 में मोर्चा बनाकर बैठे दुश्मनों के खिलाफ वायुसेना द्वारा शुरू किये गए आॅपरेशन सफेद चादर में सटीक लेजर-निर्देशित बम से लैस मिराज 2000 जेट लड़ाकू विमान, साथ ही मिग-21 और मिग-27 ने दुश्मनों को निर्णायक और करारी चोट पहुंचाई और रणनीतिक ऊंचाइयों से उन्हें तेजी से पीछे हटने के लिए मजबूर किया। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। आॅपरेशन सफेद सागर के तहत, भारतीय वायु सेना ने पहली बार दुश्मन को निशाना बनाने के लिए सटीक मार करने वाले बमों का इस्तेमाल किया था। देश ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर द्रास स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले कई पूर्व सैनिकों ने हिस्सा लिया, इनमें भारतीय वायु सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल थे। इसके अलावा, एक नई वेब-सीरीज आॅपरेशन सफेद सागर: द अनटोल्ड स्टोरी आॅफ द कारगिल वॉर का प्रीमियर भी सात अगस्त को होना है जो उस समय के गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन की कहानी दिखाती है। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर जयदीप सिंह ने बताया, आॅपरेशन सफेद सागर के दौरान, रणनीतिक ऊंचाइयों पर मौजूद घुसपैठियों को हटाने के लिए वायुसेना को हवाई मदद की जिम्मेदारी दी गई। हमला बहुत ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन पर किया गया। यह दुनिया भर में उस समय हवाई ताकत का इस्तेमाल करने वाली सबसे ऊंची जगहों में से एक थी। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि वायुसेना ने मिग-21, मिग-27 और मिराज-2000 विमानों का इस्तेमाल किया, जो सटीक निशाना लगाने वाले लेजर निर्देशित बम से लैस थे। उन्होंने कहा कि इन लड़ाकू विमानों ने दुश्मन को निर्णायक और करारी शिकस्त दी, जिससे कारगिल की उन ऊंचाइयों से उनके पीछे हटने की प्रक्रिया तेज हो गई। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा, वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने जरूरी मदद दी और घायलों को निकालने में सहायता की, जबकि परिवहन विमानों ने अग्रिम हवाई पट्टियों तक साजो-सामान पहुंचाया। द्रास स्मारक के प्रांगण में वायुसेना का एक पुराना मिग-21 विमान प्रदर्शित किया गया है। विमान के पास लगी एक पट्टिका पर लिखा है, यहां प्रदर्शित मिग-21 विमान बठिंडा के किल्ली भिसियाना एयरबेस पर मौजूद ‘गोल्डन एरोज’ (स्क्वाड्रन नंबर 17) का हिस्सा था। इस स्क्वाड्रन की कमान स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा के पास थी, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया और उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और कारगिल युद्ध में भूमिका निभाने वाले ग्रुप कैप्टन संजय मिश्रा ने 26 जुलाई को द्रास स्मारक में पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान उन दिनों को याद किया जब वह ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वाड्रन का हिस्सा थे। मिश्रा ने बताया, वहां (लॉन में) जो विमान आप देख रहे हैं, वही विमान मैंने लगभग 15 साल तक उड़ाया था। उसका टेल नंबर सी 1538 था। उन्होंने कहा, सेवानिवृत्ति के बाद मुझे अपने ठीक पीछे (द्रास स्मारक के) तोलोलिंग पहाड़ी पर चढ़ने का मौका मिला। वहां से मुझे एहसास हुआ कि तोलोलिंग की लड़ाई कितनी मुश्किल थी, क्योंकि दुश्मन ऐसी ऊंचाई पर बैठा था जिसका उसे सामरिक लाभ मिल रहा था। फिर भी, बहादुर सैनिकों ने लड़ाई लड़ी और हमें जीत दिलाई। आने वाली वेब-सीरीज आॅपरेशन सफेद सागर में स्क्वाड्रन लीडर आहूजा की भूमिका को भी प्रमुखता से दशार्या गया है। उस इलाके में दुश्मन की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एसएएम) के खतरे की जानकारी होने के बावजूद, जब आहूजा दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान के एक पायलट का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, तब उनके विमान को दुश्मन की कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल (एसएएम) ने निशाना बनाया था। कारगिल युद्ध के दौरान बर्फ से ढंकी पहाड़ियों पर लड़ी गई लड़ाइयों में वायुसेना के मिराज 2000 विमानों ने अहम भूमिका निभाई। इन्होंने जून 1999 में मुंथो ढालो में सफलता हासिल करने के अलावा टाइगर हिल पर बंकर बनाकर छिपे दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बनाया। वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने जून 2019 में ग्वालियर में हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को तैनात करने और जमीनी सेना को हवाई मदद देने से 1999 के युद्ध का पासा भारत के पक्ष में पलट गया था। धनोआ स्वयं युद्ध के समय 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग आॅफिसर थे।

कैसे बदली कारगिल की जंग की तस्वीर

1999 में जब दुश्मन कारगिल की दुर्गम चोटियों पर मोर्चा जमाकर बैठा था, तब भारतीय वायुसेना ने आॅपरेशन सफेद सागर के जरिए पहली बार सटीक मार करने वाले लेजर-निर्देशित बमों का इस्तेमाल किया। मिराज 2000, मिग-21 और मिग-27 विमानों ने इन बमों से लैस होकर ऐसी ऊंचाई पर हमला किया, जो दुनिया में हवाई ताकत के इस्तेमाल की सबसे चुनौतीपूर्ण जगहों में शुमार थी। इससे दुश्मन को निर्णायक शिकस्त मिली और उसे रणनीतिक ठिकानों से पीछे हटना पड़ा। जून 1999 में मुंथो ढालो और टाइगर हिल पर मिराज 2000 की कार्रवाई निर्णायक साबित हुई। वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, जो खुद उस समय 17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरोज) के कमांडिंग आॅफिसर थे, ने कहा था कि मिराज की तैनाती ने युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया। इस स्क्वाड्रन की कमान संभालने वाले स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा दुश्मन की कंधे से दागी मिसाइल का शिकार होकर शहीद हुए और उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र मिला। हेलीकॉप्टरों ने घायलों को निकाला, परिवहन विमानों ने साजो-सामान पहुंचाया। 26 जुलाई को द्रास स्मारक पर मनाई गई 27वीं वर्षगांठ में पूर्व सैनिकों ने इन यादों को ताजा किया।

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