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गंगा एक्सप्रेसवे से भी लंबा होगा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे! 740 KM का मेगा कॉरिडोर, 7.5 घंटे में पूरा होगा सफर

गंगा एक्सप्रेसवे से भी लंबा होगा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे! 740 KM का मेगा कॉरिडोर, 7.5 घंटे में पूरा होगा सफर

Gorakhpur-Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। पश्चिमी यूपी के शामली को पूर्वांचल के गोरखपुर से जोड़ने वाला शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब निर्माण प्रक्रिया की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 740 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे बन सकता है। मौजूदा समय में गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है।

सबसे खास बात यह है कि इस कॉरिडोर से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद शामली से गोरखपुर की यात्रा का समय करीब 12 घंटे से घटकर 7.5 घंटे रह सकता है। वहीं दिल्ली से गोरखपुर का सफर लगभग 8 घंटे में पूरा होने का अनुमान बताया गया है।

740 KM का एक्सप्रेसवे, दो फेज में होगा निर्माण

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को दो चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में शामली से शाहजहांपुर के पुवायां तक करीब 348.184 किलोमीटर का हिस्सा प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर शामली में दिल्ली-देहरादून और अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे के जंक्शन से जुड़ता है।दूसरे चरण में पुवायां से गोरखपुर तक करीब 391.77 किलोमीटर का हिस्सा बनाया जाना है। दोनों चरणों की लंबाई मिलाकर पूरा कॉरिडोर करीब 740 किलोमीटर का बैठता है।

8 पैकेज अब निर्माण प्रक्रिया में

प्रोजेक्ट को लेकर हालिया अपडेट इसे और महत्वपूर्ण बनाता है। NHAI ने पैकेज 9, 10, 11 और 12 के लिए निर्माण संबंधी बोलियां आमंत्रित की हैं। इन पैकेजों की बोलियां 6 नवंबर 2026 को खोली जानी हैं। इससे पहले पैकेज 5, 6, 7 और 8 के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।इस तरह कुल 8 पैकेज और करीब 532.9 किलोमीटर का हिस्सा फिलहाल बिडिंग प्रक्रिया में पहुंच चुका है। पैकेज 9 की डिजाइन लंबाई 44.7 किलोमीटर है, जबकि पैकेज 10 की लंबाई 69.25 किलोमीटर है। पैकेज 11 करीब 82.45 किलोमीटर और पैकेज 12 करीब 83.194 किलोमीटर का है।

दिल्ली से लेकर बिहार-बंगाल तक कनेक्टिविटी

इस एक्सप्रेसवे का असर सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहने वाला है। शामली की तरफ यह दिल्ली-देहरादून और अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा। इसके जरिए दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब की ओर से आने वाले ट्रैफिक को पूर्वी यूपी की ओर तेज कनेक्टिविटी मिल सकती है।वहीं गोरखपुर की तरफ से यह पूर्वी भारत की ओर जाने वाले कॉरिडोर से जुड़कर बिहार और पश्चिम बंगाल तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल और आगे पूर्वी भारत तक तेज सड़क संपर्क तैयार करना है।

सफर के साथ कारोबार को भी मिल सकती है रफ्तार

एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद सिर्फ यात्रा का समय कम होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि माल ढुलाई, कृषि उत्पादों की आवाजाही, औद्योगिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स को भी फायदा हो सकता है। पश्चिमी यूपी के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को पूर्वांचल के बड़े बाजारों से जोड़ने में यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।यानी गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि यूपी के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाला करीब 740 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर बनने की दिशा में बढ़ रहा है। अब नजर निर्माण प्रक्रिया की अगली स्टेज और टेंडर के बाद जमीन पर काम शुरू होने की समयसीमा पर है।

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