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गोबर से खाद तक : त्रिवेंद्र रावत ने संसद में उठाई किसानों की बात

जैविक खाद पर जीएसटी और सब्सिडी को लेकर सरकार से मांगा जवाब देहरादून/नई दिल्ली। हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में कृषि एवं पशुधन अपशिष्ट से निर्मित जैव-उर्वरकों, गोबर आधारित उर्वरकों तथा उनके उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाइयों…

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गोबर से खाद तक : त्रिवेंद्र रावत ने संसद में उठाई किसानों की बात

जैविक खाद पर जीएसटी और सब्सिडी को लेकर सरकार से मांगा जवाब

देहरादून/नई दिल्ली। हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में कृषि एवं पशुधन अपशिष्ट से निर्मित जैव-उर्वरकों, गोबर आधारित उर्वरकों तथा उनके उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता एवं जीएसटी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से उठाया। सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से पूछा कि क्या केंद्र सरकार कृषि एवं पशुधन अपशिष्ट, विशेषकर गोबर आधारित जैव-उर्वरकों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए कोई योजना अथवा वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही उन्होंने जैव-उर्वरकों एवं गोबर आधारित उत्पादों पर लागू जीएसटी व्यवस्था तथा प्राकृतिक खेती और सतत कृषि को बढ़ावा देने के संदर्भ में सरकार का पक्ष भी जाना। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि वर्तमान में मंत्रालय के स्तर पर कृषि एवं पशुधन अपशिष्ट से निर्मित जैव-उर्वरकों अथवा गोबर आधारित उर्वरकों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए कोई पृथक योजना संचालित नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पैकेज एवं लेबल वाले पशु अथवा वनस्पति आधारित उर्वरकों तथा जैविक खाद पर जीएसटी लागू नहीं है, जबकि पैकेज्ड एवं लेबलयुक्त उत्पादों पर प्रचलित जीएसटी प्रावधान लागू होते हैं। सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को निरंतर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेष एवं गोबर जैसे संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि संसद में इस विषय को उठाने का उद्देश्य किसानों, गौपालकों एवं ग्रामीण उद्यमियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना तथा वर्तमान नीति की स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में भविष्य में और प्रभावी पहल से किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा।

राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दिया जवाब

हरिद्वार सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में कृषि व पशुधन अपशिष्ट से बने जैव-उर्वरकों और गोबर आधारित खादों का मुद्दा उठाया। उन्होंने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से पूछा कि क्या ऐसी इकाइयों की स्थापना के लिए कोई योजना या वित्तीय सहायता है, साथ ही इन उत्पादों पर लागू जीएसटी व्यवस्था पर भी स्पष्टीकरण मांगा। राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित जवाब में बताया कि मंत्रालय के पास ऐसी कोई अलग योजना नहीं है। उन्होंने साफ किया कि बिना पैकेजिंग व लेबल वाली जैविक खाद पर जीएसटी नहीं लगता, जबकि पैकेज्ड उत्पादों पर सामान्य दरें लागू होती हैं। रावत ने कहा कि मोदी सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती को लगातार बढ़ावा दे रही है, और गोबर व कृषि अवशेष जैसे संसाधनों का सही उपयोग किसानों की आय बढ़ाने व ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने में मददगार होगा। उन्होंने इस दिशा में और प्रभावी नीतियों की उम्मीद जताई।