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गैस सिलेंडर के लिए महीनों से एजेंसी के चक्कर, उपभोक्ता परेशान

गैस सिलेंडर के लिए महीनों से एजेंसी के चक्कर, उपभोक्ता परेशान

रहीमाबाद की मौर्या इंडियन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने लगाए टालमटोल के आरोप

बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। रहीमाबाद स्थित मौर्या इंडियन गैस एजेंसी पर घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिलने से उपभोक्ता परेशान हैं। आरोप है कि बीते करीब एक महीने से कई उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार जल्द गैस मिलने का आश्वासन देकर वापस लौटा दिया जाता है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद एजेंसी कर्मचारियों ने मोबाइल पर ओटीपी और डीएससी कोड ले लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता।

उपभोक्ता रवि ने बताया कि वह कई दिनों से गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। कर्मचारियों से पूछने पर कभी आज तो कभी कल गैस आने की बात कही जाती है, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल सका। वहीं, रहीमाबाद निवासी अरविंद चौरसिया ने बताया कि करीब छह वर्ष पहले उनका उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन हुआ था। उनका आरोप है कि अब तक उन्हें गैस सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बावजूद एजेंसी की ओर से हर महीने फोन कर गैस बुक कराने और गैस नहीं उठाने के बारे में पूछा जाता है। उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक गैस की कॉपी भी नहीं मिली है। कुशलखेड़ा निवासी दिलीप ने बताया कि उन्होंने 12 अगस्त को गैस की बुकिंग कराई थी।

अगले दिन एजेंसी कर्मचारियों ने फोन कर डीएससी नंबर ले लिया। इसके बाद वह एजेंसी पहुंचे, लेकिन गैस नहीं दी गई। 31 अगस्त को दोबारा एजेंसी पहुंचने पर केवल एक पर्ची बनाकर दे दी गई और एक-दो दिन बाद सिलेंडर लेने के लिए बुलाया गया। दोबारा पहुंचने पर भी उन्हें टालमटोल कर वापस लौटा दिया गया। उन्होंने एजेंसी के नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। चंदीखेड़ा निवासी पवन कुमार ने बताया कि वह कई बार सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी जा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें किसी न किसी कारण से वापस कर दिया जाता है।

इसी तरह देशराज ने बताया कि वह करीब 15 दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा उनकी ओटीपी और डीएससी संख्या ले ली जाती है, लेकिन गैस सिलेंडर नहीं दिया जाता। महादेव ने बताया कि उनकी पत्नी शांति के नाम गैस कनेक्शन है। फरवरी माह से करीब सात महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला है। उनका कहना है कि गैस के लिए लगातार एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गैस सिलेंडर की लगातार किल्लत और कथित टालमटोल से उपभोक्ताओं में नाराजगी है। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराकर समय से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने तथा बुकिंग के बाद डिलीवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

डिलीवरी कोड लेने के बाद मोबाइल पर आ जाता है डिलीवरी का संदेश

दर्जनों उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी की ओर से फोन पर ओटीपी और डीएससी कोड ले लिया जाता है। इसके बाद मोबाइल पर गैस डिलीवर होने का संदेश भी आ जाता है, जबकि वास्तविकता में उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिलता। एजेंसी पहुंचने पर कई लोगों को सादे कागज पर पर्ची लिखकर दे दी जाती है और बाद में सिलेंडर देने की बात कही जाती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस तरह उन्हें कई दिनों और महीनों तक एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं उपभोक्ताओं का आरोप है कि महंगे दामों पर सिलेंडर ब्लैक में वैन चालकों और दुकानदारों को बेचें जा रहे हैं। जिससे उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल रही है।

 

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