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फर्जी दस्तावेजों के सहारे नवजात बेचने का भांडाफोड़, निजी अस्पताल के दो डॉक्टरों समेत प्रबंधन पर एफआईआर

फर्जी दस्तावेजों के सहारे नवजात बेचने का भांडाफोड़, निजी अस्पताल के दो डॉक्टरों समेत प्रबंधन पर एफआईआर

पुलिस और चाइल्डलाइन की संयुक्त कार्रवाई में नवजात सुरक्षित, वीडियोग्राफी के साथ जांच शुरू 

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ।

गुडंबा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुर्सी रोड स्थित ‘सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक’ में फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक नवजात शिशु को दूसरे परिवार को सौंपने (बेचने) की सोमवार को एक गंभीर घटना सामने आयी है। चाइल्डलाइन और गुडंबा पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नवजात को अपने संरक्षण में ले लिया है। इस मामले में पुलिस ने अस्पताल के दो डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

​मिली जानकारी के अनुसार, चाइल्डलाइन की हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर जयवती को गुप्त सूचना मिली थी कि सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक के माध्यम से एक नवजात बच्चे को नियम-विरुद्ध तरीके से दूसरे परिवार को सौंपा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम शांतिबाग निवासी रेनू शर्मा के आवास पर पहुंची। पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। रेनू शर्मा ने बताया कि बच्चे को बहादुरपुर निवासी आरती देवी ने जन्म दिया था। आरोप है कि आरती देवी को मकान बनवाने का झांसा दिया गया और अस्पताल के डॉ. शालू व डॉ. विनोद ने जन्म से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

इन फर्जी कागजातों में नवजात को आरती की जगह रेनू शर्मा का बच्चा दिखाया गया और फिर बच्चे को रेनू को सौंप दिया गया। ​वीडियोग्राफी के साथ बयान: पुलिस दोनों महिलाओं और नवजात को थाने ले आई, जहां महिला हेल्पडेस्क पर दोनों महिलाओं के बयानों की वीडियोग्राफी कराई गई। ​दस्तावेज जब्त: पुलिस ने आधार कार्ड, डिलीवरी रिकॉर्ड, टीकाकरण कार्ड समेत सभी संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है। ​मेडिकल परीक्षण: मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोनों महिलाओं का डॉक्टरी परीक्षण कराया गया है।

गुडंबा थाना प्रभारी अंजनी कुमार मिश्रा ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर शालू, डॉक्टर विनोद और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर  दर्ज कर ली गई है। दस्तावेजों की सत्यता और अस्पताल की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। दोनों डॉक्टरों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल नवजात शिशु पूरी तरह से सुरक्षित है और उसे चाइल्डलाइन व पुलिस के संरक्षण में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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