कांग्रेस का SIR पर सवाल: आराधना मिश्रा मोना बोलीं- ‘मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल’

लखनऊ, 26 सितंबर। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अभय दुबे और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मतदाता सूची में कथित बदलाव और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मताधिकार है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और वोटों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है।
हरियाणा चुनाव का किया जिक्र
आराधना मिश्रा मोना ने हरियाणा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और कांग्रेस ने चुनाव के दौरान वोटों से जुड़े सवाल उठाए थे।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की बैठकों को लेकर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि आयोग के दो सदस्यों की बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और कई महीनों तक बैठक नहीं हुई।
ये दावे कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे गए हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची खोजने, नाम की स्थिति देखने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और करीब साढ़े 13 करोड़ वोटों के कटने की बात कही।
हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टिंग में कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं ने SIR के तहत मतदाता नाम हटाए जाने के अलग-अलग आंकड़े पेश किए हैं। उदाहरण के लिए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सितंबर में SIR के एक चरण में 6.18 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया था और बड़ी संख्या में अन्य मतदाताओं के नाम हटने की आशंका जताई थी।
पश्चिम बंगाल में नाम हटाने पर भी विवाद
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंचा है। निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि SIR के दौरान पश्चिम बंगाल में 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने पुनः नाम शामिल कराने के लिए अपील की। आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट प्रविष्टियों से जुड़े मामले भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में अपीलें अभी लंबित भी हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर मांगा जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और मतदाता सूची में हो रहे बदलावों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए। आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि मतदाता सूची में बदलावों को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है।
वहीं, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवाओं में मतदाता सूची में नाम खोजने, नाम जोड़ने, सुधार कराने और प्रस्तावित नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं। इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष और विभिन्न राज्यों में अंतिम मतदाता सूचियों की प्रक्रिया इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।



