स्वतंत्रनिर्भीक पत्रकारिता
BREAKING NEWS
एराज़ मेडिकल कॉलेज में छह दिवसीय इग्नाइट-2026 का समापन.... सफायर ने कई स्पर्धाओं में हासिल की जीतपंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह ने प्रदेशवासियों को दी दीपावली की शुभकामनाएंचुनाव करीब आते ही अखिलेश को याद आए रामलला के दर्शन : पंकज चौधरीदसवें दीपोत्सव-2026: अयोध्या में राम दरबार का राज्याभिषेक, योगी ने खींचा प्रभु श्रीराम का रथसूर्यकुमार यादव ने परिवार के साथ पीएम मोदी से की मुलाकात, नन्हीं सरयू ने सुनाया कन्नड़ गीतसुहास एलवाई समेत पैरा खिलाड़ियों ने की पीएम से मुलाकातएलपीजी बॉटलिंग प्लांट में चल रही ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल समाप्तअज्ञात वाहन की ठोकर से ऑटो चालक की मौतडीसीएम में पीछे से घुसी कार एक की मौत चार घायलधनतेरस पर जाम से जूझा हाईवे, सड़क पर उतरे एसीपी ने संभाली कमानएराज़ मेडिकल कॉलेज में छह दिवसीय इग्नाइट-2026 का समापन.... सफायर ने कई स्पर्धाओं में हासिल की जीतपंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह ने प्रदेशवासियों को दी दीपावली की शुभकामनाएंचुनाव करीब आते ही अखिलेश को याद आए रामलला के दर्शन : पंकज चौधरीदसवें दीपोत्सव-2026: अयोध्या में राम दरबार का राज्याभिषेक, योगी ने खींचा प्रभु श्रीराम का रथसूर्यकुमार यादव ने परिवार के साथ पीएम मोदी से की मुलाकात, नन्हीं सरयू ने सुनाया कन्नड़ गीतसुहास एलवाई समेत पैरा खिलाड़ियों ने की पीएम से मुलाकातएलपीजी बॉटलिंग प्लांट में चल रही ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल समाप्तअज्ञात वाहन की ठोकर से ऑटो चालक की मौतडीसीएम में पीछे से घुसी कार एक की मौत चार घायलधनतेरस पर जाम से जूझा हाईवे, सड़क पर उतरे एसीपी ने संभाली कमान

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने गिनाए सपा शासन के 34 मामले

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने गिनाए सपा शासन के 34 मामले

  • कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, भर्ती और परिवारवाद पर उठाए सवाल, कहा कि 34 वर्षों का हिसाब अब जनता के सामने


पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सपा ने भले ही लोहिया के आदर्शों के नाम पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में उसकी तीन सरकारों के कार्यकाल को देखें तो काम कम और कांड-कारनामे ज्यादा नजर आते हैं।
यह बातें उन्होंने रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं। 

चौधरी ने कहा कि सपा के राजनीतिक सफर की शुरुआत से ही उसका इतिहास गंभीर विवादों से जुड़ा रहा है। 1994 के रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाएं वहीँ अगले वर्ष 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड कि घटना भी सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सत्ता का केंद्र परिवार के भीतर रहा। डिंपल यादव को निर्विरोध निर्वाचित कराने के लिए उनके प्रतिद्वंद्वियों को कथित धमकी दिए जाने, मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 50 विभाग अपने पास रखने तथा बिजली आपूर्ति में चुनिंदा वीआईपी जिलों को प्राथमिकता दिए जाने जैसे मुद्दों ने तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इसी दौर में सपा कार्यकर्ताओं द्वारा थानों में हस्तक्षेप और कानून अपने हाथ में लेने के आरोप भी सामने आते रहे। 

यादव सिंह प्रकरण पर उन्होंने कहा कि मामले में सीबीआई जांच और संपत्तियों की जांच हुई। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच यश भारती पुरस्कारों के वितरण को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुरस्कारों के वितरण में पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए चौधरी ने तत्कालीन मंत्री आजम खान पर अधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप और एक विशेष वर्ग के लोगों को बचाने पर कहा कि इस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों के विस्थापन की बात सामने आई साथ ही सहारनपुर दंगे में तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। चौधरी ने मुफ्त लैपटॉप योजना और बेरोजगारी भत्ते को लेकर सपा सरकार पर निशाना साधा। 

उन्होंने दावा किया कि लगभग 15 लाख लैपटॉप की खरीद के बावजूद करीब 6 लाख ही वितरित किए गए और कैग ऑडिट में इससे जुड़े तथ्य सामने आए। बेरोजगारी भत्ते के नाम पर 20.58 करोड़ रुपये के वितरण के मुकाबले प्रचार पर 15.06 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि युवाओं के नाम पर योजनाएं बनाना अलग बात है और उनका पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना अलग। उन्होंने यूपीपीएससी में जातीय भर्ती विवाद और अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर कहा कि नियुक्ति को लेकर न्यायालय तक मामला पहुंचा व स्वतंत्र पत्रकारों के कथित उत्पीड़न तथा दलित लेखक कंवल भारती की गिरफ्तारी के संदर्भ में कहा कि सपा शासन में सरकार की आलोचना करने वालों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर प्रश्न उठे। 

किसानों के मुद्दे पर आगे उन्होंने कहा कि 2013 से 2016 के बीच गन्ना किसानों के राज्य परामर्श मूल्य को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठे और तीन वर्षों तक यह 280 प्रति क्विंटल के स्तर पर रहा तथा गन्ना ब्याज माफी के मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद किसानों को राहत मिली। अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन, कानून का राज, विकास, गरीबों और युवाओं के हित तथा पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रही है। इसके विपरीत, सपा के शासनकाल से जुड़े इन मामलों का जवाब जनता के सामने होना चाहिए।

साझा करें:fxw
हर खबर, हर पल — जुड़े रहें!हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए हमारे न्यूज़लेटर से जुड़ें