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70 सागौन पेड़ों की जांच के बीच, ठेकेदार बेचैन...जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर मंडराता रहा

70 सागौन पेड़ों की जांच के बीच, ठेकेदार बेचैन...जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर मंडराता रहा

पीलीभीत। जिला पंचायत के 70 बेशकीमती सागौन के पेड़ों की नीलामी का मामला अब सिर्फ नीलामी की कीमत तक सीमित नहीं रह गया है। नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच जिलाधिकारी की ओर से जांच कमेटी गठित की गई है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही लकड़ी को मौके से हटाकर ठिकाने लगाने से मामले को और पेचीदा बना दिया है। रविवार को बिना अनुमति लकड़ी से भरी डीसीएम को वन विभाग की टीम द्वारा पकड़े जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि जिला पंचायत के 70 सागौन के पेड़ों की नीलामी को लेकर शिकायतें की गई थी। आरोप है कि बेशकीमती सागौन के पेड़ों का समुचित मूल्यांकन कराए बिना अपेक्षाकृत कम कीमत पर नीलामी की गई, जिससे ठेकेदार को लाभ पहुंचने की आशंका जताई गई। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की पड़ताल शुरू कराई है। हालांकि नीलामी में अनियमितता और किसी को लाभ पहुंचाने के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

जांच के बीच ठेकेदार ने उठा ली लकड़ी

मामले में सबसे ज्यादा सवाल रविवार की घटना को लेकर उठ रहे हैं। जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि लकड़ी को मौके से हटाने की कोशिश की गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने लकड़ी से लदी डीसीएम को पकड़ लिया। अब सवाल यह है कि जब जांच कमेटी को पेड़ों की संख्या, लकड़ी की मात्रा, गुणवत्ता और नीलामी मूल्य का सत्यापन करना है तो जांच पूरी होने से पहले लकड़ी हटाने की जरूरत क्यों महसूस हुई।

जांच पूरी होने तक लकड़ी को सुरक्षित स्थान पर रखकर उसकी विधिवत पैमाइश और सत्यापन कराया जा सकता था। ऐसे में वाहन पकड़े जाने की घटना ने मामले में एक नया मोड़ आ गया है।

कलेक्ट्रेट में ठेकेदार की आवाजाही चर्चा में

उधर जांच का शिकंजा कसते ही कलेक्ट्रेट परिसर में लकड़ी ठेकेदार की आवाजाही भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ठेकेदार जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर चक्कर लगाता और जांच से संबंधित गतिविधियों की टोह लेता दिखाई दिया। जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर उसकी लगातार मौजूदगी को लेकर कलेक्ट्रेट में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं है।
हालांकि ठेकेदार जांच अधिकारी के कार्यालय के बाहर किस उद्देश्य से मौजूद था, लेकिन जांच के बीच ठेकेदार की लगातार सक्रियता और दूसरी ओर लकड़ी हटाने का प्रयास ने सवाल जरूर बढ़ा दिए हैं।

नीलामी से लेकर लकड़ी की निकासी तक होगी पड़ताल

अब जांच कमेटी के सामने नीलामी की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल चुनौती होगी। पेड़ों का मूल्यांकन किस आधार पर हुआ, उनका वास्तविक बाजार मूल्य क्या था, नीलामी की शर्तें क्या थी, कितनी कीमत पर ठेका दिया गया, कितने पेड़ों की कटान हुआ , मौके पर कितनी लकड़ी मौजूद थी और उसे हटाने की अनुमति किस स्तर से मिली—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी होगी।

स्थानीय स्तर पर एएमए और जिला पंचायत प्रशासक के संरक्षण में पेड़ों की कटान कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं। अब जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा कि नीलामी प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी हुई या पूरी कार्रवाई नियमानुसार थी।
फिलहाल 70 सागौन के पेड़ों की कीमत से ज्यादा बड़ा सवाल यह बन गया है कि जांच पूरी होने से पहले लकड़ी हटाने की इतनी जल्दबाजी आखिर क्यों थी, और जांच अधिकारी के दरवाजे पर ठेकेदार की यह परिक्रमा किस जवाब की तलाश में थी।

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