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मां की एक छोटी सी सलाह ने बदल दिया ‘दिल चाहता है’ का आइकॉनिक सीन, फरहान अख्तर ने खोला 25 साल पुराना राज

मां की एक छोटी सी सलाह ने बदल दिया ‘दिल चाहता है’ का आइकॉनिक सीन, फरहान अख्तर ने खोला 25 साल पुराना राज

मुंबई। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘दिल चाहता है’ को रिलीज हुए करीब 25 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी फिल्म के कई सीन और किरदार दर्शकों के बीच खास जगह रखते हैं। अब फिल्म के निर्देशक और अभिनेता फरहान अख्तर ने इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी मां और मशहूर स्क्रीनराइटर हनी ईरानी ने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ने के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इनमें से एक सुझाव ऐसा था, जिसने फिल्म के एक सीन को यादगार बना दिया।

फरहान अख्तर ने बताया कि ‘दिल चाहता है’ बनाने से पहले ही उनकी मां हनी ईरानी हिंदी सिनेमा में एक अनुभवी लेखिका के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी थीं। जब फरहान ने अपने निर्देशन की पहली फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्ट तैयार की, तो उन्होंने उसे अपनी मां को भी पढ़ने के लिए दिया। फरहान के मुताबिक, हनी ईरानी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी स्क्रिप्ट को सिर्फ एक लेखक की नजर से नहीं, बल्कि एक आम दर्शक की तरह पढ़ती थीं।

‘मां में गजब का ह्यूमर है’

फरहान ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी मां में शानदार सेंस ऑफ ह्यूमर है। वह किसी भी सीन को जरूरत से ज्यादा गंभीर या बौद्धिक बनाने के बजाय यह समझने की कोशिश करती हैं कि दर्शक उसे किस तरह महसूस करेगा।फरहान के मुताबिक, हनी ईरानी ने उन्हें यह समझने में मदद की कि हर भावना को संवादों के जरिए समझाने की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी सीन को सिर्फ महसूस करवाना ही उसे ज्यादा प्रभावी बना देता है। उन्होंने स्क्रिप्ट में ऐसे हिस्सों को हल्का करने की सलाह दी, जहां जरूरत से ज्यादा गंभीरता आ रही थी।

मां के सुझाव से बदला आमिर खान का सीन

फरहान ने बताया कि फिल्म के एक खास सीन में उनकी मां की सलाह ने बड़ा बदलाव किया। यह वह दृश्य था जिसमें आमिर खान का किरदार आकाश एक ऐसे व्यक्ति को देखता है, जो शालिनी के पास जाता हुआ नजर आता है।फरहान ने बताया कि उनके शुरुआती ड्राफ्ट में आकाश उस व्यक्ति को देखता था और फिर उसके वहां से चले जाने के बाद खुद भी आगे बढ़ जाता था। लेकिन हनी ईरानी ने इस सीन को अलग अंदाज में करने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि आकाश को उस व्यक्ति के पास वापस जाकर उसे गले लगाना चाहिए। फरहान को यह आइडिया पसंद आया और इसे फिल्म में शामिल किया गया। यही छोटा-सा बदलाव आगे चलकर फिल्म के सबसे मजेदार और यादगार कॉमिक मोमेंट्स में से एक बन गया।

फिल्म में दिखी फरहान की निजी जिंदगी की झलक

फरहान अख्तर ने यह भी बताया कि फिल्म के कुछ पारिवारिक रिश्तों को लिखते समय उन्होंने अपनी निजी जिंदगी से भी प्रेरणा ली थी। खासतौर पर सिड और उसकी मां के रिश्ते में उन्हें अपने परिवार की झलक दिखाई देती है।फरहान ने बताया कि उनकी मां हनी ईरानी ने उनकी और उनकी बहन जोया अख्तर की परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी मां को परिवार की ताकत बताया और माना कि फिल्म में मां-बेटे के रिश्ते को लिखते समय उनके निजी अनुभवों की भी छाप रही।

हनी ईरानी का योगदान सिर्फ सलाह तक सीमित नहीं

‘दिल चाहता है’ में हनी ईरानी का योगदान सिर्फ एक अनुभवी लेखक के तौर पर स्क्रिप्ट पर सुझाव देने तक सीमित नहीं था। उन्होंने फरहान को यह भरोसा दिलाने में मदद की कि कहानी को जरूरत से ज्यादा समझाने की बजाय दर्शकों को उसे महसूस करने की आजादी दी जानी चाहिए।फरहान के निर्देशन की पहली फिल्म के लिए यह सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। फिल्म में दोस्ती, प्यार, रिश्तों और जिंदगी के उतार-चढ़ाव को जिस सहज अंदाज में पेश किया गया, उसने इसे हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।फरहान की इस कहानी से एक बात साफ होती है कि ‘दिल चाहता है’ की चमकदार सफलता के पीछे सिर्फ शानदार कलाकार और कहानी ही नहीं थी, बल्कि पर्दे के पीछे हनी ईरानी जैसे अनुभवी लेखकीय नजरिए का भी योगदान था। मां से मिली एक छोटी-सी रचनात्मक सलाह ने फिल्म के एक दृश्य को ऐसा अंदाज दिया, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं।

 

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