- -जेसी बोस विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में 3,877 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
- राज्यपाल ने चार नई तकनीकी परियोजनाओं का उद्घाटन
कविता। फरीदाबाद
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं से विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि बदलते तकनीकी दौर में युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनें। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी के दौर में आचार्य जगदीश चंद्र बोस की जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। युवाओं को विकसित भारत के निर्माण को केवल अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में लेना चाहिए।

राज्यपाल सोमवार को जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और दीक्षांत भाषण दिया। हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष भी समारोह में मौजूद रहीं। कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने स्वागत भाषण दिया।
3,877 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
वर्ष 2024 और 2025 में पाठ्यक्रम पूरा करने वाले कुल 3,877 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 2,079 छात्र और 1,798 छात्राएं शामिल हैं। उपाधि प्राप्त करने वालों में 68 शोधार्थी भी हैं, जिनमें 46 महिला शोधार्थी हैं। दोनों वर्षों के लिए दो-दो विद्यार्थियों को राज्यपाल-कुलाधिपति पदक और मुख्यमंत्री पदक प्रदान किए गए, जबकि 19 विद्यार्थियों को कुलगुरु पदक से सम्मानित किया गया। बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग की विधि रैना और हर्षिका वत्स को राज्यपाल-कुलाधिपति पदक तथा बीटेक रोबोटिक्स एवं कृत्रिम मेधा के राम सेवक और बीटेक सूचना प्रौद्योगिकी की आकृति मित्तल को मुख्यमंत्री पदक प्रदान किया गया।
चार नई तकनीकी सुविधाओं का उद्घाटन
दीक्षांत समारोह से पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय ज्ञान संसाधन केंद्र, इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र, यूएवी एवं एंटी-ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र तथा दृश्य डिजाइन एवं एनीमेशन स्टूडियो का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, तकनीकी और रचनात्मक ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिए अपने विवेकाधीन कोष से 25 लाख रुपये अनुदान देने की घोषणा भी की। इस राशि का एक हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सहायता में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रो. घोष ने कहा कि विश्वविद्यालय को उद्योग, अनुसंधान और समाज के बीच मजबूत सेतु की भूमिका निभानी चाहिए। उद्योग-अकादमिक सहयोग, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
प्रो. नागेश्वर राव ने विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने, नवाचार अपनाने और समाज के लिए सार्थक योगदान देने का संदेश दिया। कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, अनुसंधान, नवाचार, उन्नत प्रयोगशालाओं, उत्कृष्टता केंद्रों, डिजिटल परीक्षा व्यवस्था, रोजगार, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उपलब्धियां प्रस्तुत कीं। समारोह के दौरान राज्यपाल सहित अतिथियों ने आचार्य जगदीश चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद शैक्षणिक शोभायात्रा, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, राष्ट्रीय गीत और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ दीक्षांत समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई।
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