उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों की पहचान को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर ‘परशुराम पुरी’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस फैसले को स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग और क्षेत्र की धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही जलालाबाद के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस नाम परिवर्तन की पहल कई वर्ष पहले शुरू हुई थी और अब इसे सरकार की आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है। प्रदेश सरकार का मानना है कि क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में मान्यता प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि वर्षों से स्थानीय स्तर पर इस क्षेत्र को भगवान परशुराम की पहचान के अनुरूप नाम दिए जाने की मांग उठती रही है। अब सरकार द्वारा ‘परशुराम पुरी’ नाम को मंजूरी मिलने के बाद इस मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।
इस नाम परिवर्तन की प्रक्रिया की शुरुआत मार्च 2018 में हुई थी। उस समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक समूहों ने जलालाबाद का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इस प्रस्ताव पर विचार किया जाता रहा। कई स्तरों पर समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्य कैबिनेट ने इसे अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।
जलालाबाद क्षेत्र में भगवान परशुराम का एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराएं इस क्षेत्र की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन से न केवल धार्मिक महत्व को नई पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। योगी सरकार इससे पहले भी प्रदेश के कई शहरों, कस्बों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदल चुकी है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सम्मान देना है। वहीं विपक्षी दल समय-समय पर ऐसे फैसलों को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं।
कैबिनेट के इस निर्णय के बाद अब आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। सरकारी अभिलेखों, साइन बोर्डों, प्रशासनिक दस्तावेजों और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड में भी धीरे-धीरे नए नाम को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही जलालाबाद की पहचान अब आधिकारिक रूप से ‘परशुराम पुरी’ के रूप में स्थापित होने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
स्थानीय लोगों और भगवान परशुराम के अनुयायियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और आने वाले समय में यह स्थान आस्था एवं पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर सकता है।










