देहरादून। देश की आजादी के 78 वर्ष बाद भी विकासखंड देवाल का दूरस्थ गांव बामोटिया (बेराधार) मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंची है और बिजली की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से मांग उठाने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
ग्रामीण भूपाल राम ने बताया कि सड़क सुविधा न होने के कारण गर्भवती महिलाओं, बीमारों, बुजुर्गों और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को आज भी डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा कुछ समय पूर्व बेराधार-बामोटिया मोटर मार्ग के लिए लगभग आठ किलोमीटर सड़क का सर्वे किया गया था, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीण रूपा देवी ने बताया कि गांव में बिजली पहुंचाने के लिए विद्युत विभाग द्वारा खंभे तो लाए गए, लेकिन वन विभाग की आपत्तियों के कारण कार्य अधूरा रह गया। इससे गांव के करीब 80 परिवारों और 500 से अधिक आबादी को आज भी अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ घरों में सौर ऊर्जा की व्यवस्था है, लेकिन अधिकांश परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बिजली के अभाव में ग्रामीण आधुनिक संचार, शिक्षा और सूचना सुविधाओं से भी कटे हुए हैं।
वहीं कान्ता देवी ने आरोप लगाया कि उनका परिवार वर्ष 1938 से वन भूमि पर निवास कर रहा है। उन्होंने बताया कि मकान निर्माण के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने बिना पूर्व सूचना या नोटिस दिए निर्माणाधीन भवन को ध्वस्त कर दिया, जिससे परिवार की वर्षों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई।
ग्रामीण जानकी देवी ने बताया कि वर्ष 1997 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय भवन में वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र और जूनियर हाई स्कूल भी संचालित किए जा रहे हैं। मात्र दो जर्जर कमरों में तीन शिक्षण संस्थान संचालित होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कार्य भी लंबे समय से रुका हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, बिजली, शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए कई बार प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।
इस संबंध में रूपा देवी, दीपा देवी, ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, कुंवर चंद्र, भरत कुमार, अजय राम, मुकेश राम, सूजान राम, रेखा देवी, कुंती देवी, शांति देवी, धनुली देवी, ममता देवी, गीता देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन शुरू करेंगे तथा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार पर भी विचार करेंगे।
सोनू उनियाल










